Statue of Equality: रामानुजाचार्य जी की प्रतिमा ,उनका जीवन परिचय,ग्रन्थ,एवं सम्पूर्ण जानकारी

शनिवार को प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा हैदराबाद में रामानुजाचार्य प्रतिमा का आवरण किया गया यह प्रतिमा 11 वी सदी के महान संत रामानुचार्य की जन्म के १००० साल पूरे होने के उपलक्य में नरेंद्र मोदी द्वारा भारत को समर्पित की गई है रामनुजाचार्य एक महान संत वैश्णव आचार्यो में प्रमुख इन्ही के शिष्य रामानन्द हुए जिनके शिष्य कबीर , रैदास और सूरदास हुए रामनुजाचार्य ने वेदांत दर्शन पर आधारित अपना नया दर्शन विशिष्टअद्वैत वेदांत लिखा था

Statue of Equality

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने वसंत पंचमी पर हैदराबाद में वैष्ण्व संत श्री रामनुजाचार्य स्वामी की प्रतिमा ‘स्टेच्यू ऑफ़ इक्वालिटी’ को देश को समर्पित किया 120 किलो सोने की 216 फीट ऊँची प्रतिमा श्रद्धालुओं के 1000 करोड़ रूपये के दान से वनी है

नरेंद्र मोदी जी कहा – संत श्री रामानुजाचार्य जी ने जाति भेद ख़त्म करने के लिए काम किया मोदी ने ने श्लोक सुनाया न जाति ही कारण ,लोके गुड़ा कल्याण हेतवा यानि संसार का कल्याण जाति से नहीं ,

रामानुजाचार्य का जीवन परिचय

रामनुजाचार्य का जन्म 1017 ईस्वी में दक्षिण भारत के तिरिकुदुर में हुआ था अपने बचपन में इन्होंने गुरु यादव प्रकाश जी से कांची में वेदों की शिक्षा ली रामनुजाचार्य जी आलवार के सन्त यमुनाचार्य जी के प्रधान शिष्य थे इसके बाद इन्होने ग्रस्त आश्रम त्याग कर श्रीरंगम के संत यदिराज संत सन्यासी से सन्यास की दीछा ली

इसके बाद मैसूर के श्रीरंगम को छोड़कर ये शालग्राम नामक स्थान पर रहने लगे इन्होने यहाँ 12 वर्ष तक यहाँ रहकर वैष्णव धर्म का प्रचार किया इसके बाद इन्होने पूरे भारत में वैष्णव धर्म का प्रचार किया और इसके बाद 1137 ईस्वी में ये ब्रम्हा लीन हो गए

गुरु की इक्छा से रामानुज ने तीन काम करने का संकल्प किया जो निम्न प्रकार है की ब्रम्हसूत्र ,विष्णु सह्स्त्नाम और दिव्य प्रवंधनम नामक तीन ग्रंथो की रचना की

विशिष्टअद्वैत वेदांत दर्शन

गुरु रामनुजाचार्य जी के विशिष्टअद्वैत वेदांत सिद्धांत में अपने मूल विचारो को दिया यह वैष्णव धर्म में इनके द्वारा लिखा गया ऐसा ग्रंथ था जिसमें’सत्ता तथा परम सत्ता के सम्बन्ध में तीन स्तर बताये गए है

व्रम्ह अर्थात ईश्वर

चित अर्थात आत्मा

अचित अर्थात प्रक़ति

वस्तुता चित अर्थात आत्मा तत्व ,अचित अर्थात प्रक़ति तत्त्व व्रम्हा एवं ईश्वर से पृथक नहीं ! अर्थात यह विशिष्ट रूप से ब्रम्हा का ही प्रतीक है ! अर्थात व्रम्हा या ईश्वर पर ही आधारित है ! यही रामनुजाचार्य जी का विशिष्ट अद्वैत बाद का सिद्धांत है !

क्योकि जिस तरह शरीर से आत्मा पृथक नहीं हो सकती तथा आत्मा के उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही शरीर काम करता है उसी प्रकार व्रम्हा या ईश्वर से प्रथिक चित एवं अचित का कोई महत्त्व नहीं रह जाता

स्टेच्यू ऑफ़ इक्वालिटी की कुछ खास बातें

हैदराबाद में 11 वी सदी के प्रमुख संत रामनुजाचार्य जी की प्रतिमा का लोकार्पण प्रधान मंत्री श्री मोदी द्वारा किया गया इसकी कुछ खाश बातें है !

रामनुजाचार्य की यह प्रतिमा 216 फिट ऊँची है यह भारत की दूसरी और विस्व की 26 वी सबसे बड़ी प्रतिमा है

इसे तिरुचिन्तल गांव जो हैदराबाद के बाहरी किनारे पर स्थित है जो तेलगु भाषी राज्यों के लोकप्रिय वैष्ण्व संप्रदाय के सन्याशी त्रिदंडी चिन्ना जियर जी के आश्रम में बनाई गई है इस मूर्ति का काम 2014 से चल रहा था जो अब जाकर २०२२ में पूरा हुआ

भारत के महान संतो में गिने जाने बाले इस संत रामनुजाचार्य की जन्म की 1000 वी जयंती के अवशर पर प्रधान मंत्री श्री मोदी दोवड़ा इस स्थल पर इनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया !

इस प्रतिमा की खास बात यह है की यह प्रतिमा 216 ऊँची तथा चौड़ाई 108 फिट और यह प्रतिमा 54 फिट कीऊचाई पर बनाई इन सभी में अंको के योग को जोड़ने पर मूल अंक 9 आता है !

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