स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय: svami vivekananda Biography

स्वामी विवेकानंद ब्रह्म-समाज, आर्य-समाज जैसी संस्थाओं ने देश के बोद्धिक वर्ग में एक नर्वीन चेतना का विकास किया तथा लोग अब भक्ति एवं योग जैसे मार्गों को अपनाने लगे। रामकष्ण परमहंस (परमहंस मठ के संस्थापक) ने ध्यान एवं मुक्ति को पाश्चात्यीकरण एवं आधुनिकौकरण के तत्वों के साथ मिश्रण करते हुए ईश्वरोपासना का उपाय बताया।

स्वामी विवेकानंद अपनी आधुनिक जिज्ञासा के कारण रामकृष्ण परमहस के संपर्क में आए तथा उनके उपदशों को लोगों के बीच प्रसारित किया। उन्होंने अपने गुरु परमहंस की स्मृति में 1897 ई. में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।

विवेकानंद और उनके द्वारा स्थापिद रामकृष्ण मिशन ने पश्चिम की तथाकथित धार्मिक और सांस्कृतिक श्रेष्ठता कौ धारणा को चुनौयी दी और हिंदू धर्म एवं संस्कृति की उपलब्धियों को प्रकाश में लाने का काम किया।

शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में टिंदू धर्म ओर बेदांत को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित करते हुए उन्होंने कहा कि वेदांत न केवल हिंदुओं का बल्कि सभी मनुष्यों का धर्म है।

उन्होंने वेदांत की व्यावहारिक व्याख्या कौ तथा आध्यात्मिकता और दैनिक जीवन की खाइयोौं को पाटने का प्रयास किया। पश्चिम के भौतिकवाद और पूर्व के अध्यात्मवाद के सम्मिश्रण को उन्होंने मानत जाति की भलाई का सबसे अच्छा मार्ग बताया और इस प्रकार रामकृष्ण मिशन ने भारतीय एवं पश्चिमी संस्कृति के संश्लेषक की भूमिका निभाई। 

स्वामी विवेकानंद एवं सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों में उनका योगदान 

रामकृष्ण मिशन के संस्थापक स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कलकत्ता में हुआ था। इनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। ये विद्यार्थी जीवन में बहुत प्रतिभावान एवं जिज्ञासु छात्र थे। इन्होंने रामकृष्ण परमहंस से भेंट की और उनके विचारों से प्रभावित होकर उनका शिष्यत्व ग्रहण कर लिया। इन्हें स्वामी विवेकानंद नाम खेतड़ी के महाराज ने दिया था। ‘ 

अमेरिका के शिकागो शहर के विश्व धर्म सम्मेलन  में स्वामी विवेकानंद ने 1893 ई. में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहाँ उन्होंने हिंदू धर्म पर भाषण देकर भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति को गौरवान्वित किया। शिकागो के बाद स्वामी जी ने निरंतर तीन वर्षों तक अमेरिका तथा इंग्लैंड में अपने भाषणों एवं लेखों से हिंदू धर्म का प्रचार-प्रसार किया और फिर अमेरिका में वेदांत समाज की स्थापना कौ। 

भारत लोटने पर उन्होंने 1 मई, का. को अपने गुरु के नाम पर रामकृष्ण मिशन नामक संस्था की स्थापता की। इस संस्था का उद्देश्य मानवता की सेवा था। इसके सदस्यों ने 1897 ई, के मुर्शिदाबाद के अकाल एवं कलकत्ता में प्लेग की बीमारी के समय जनता की बहुत सेवा की। रामकृष्ण मिशन ने अनेक चिकित्सालय, अनाथालय, विद्यालय, सेवाश्रम, विधवाश्रम आदि खुलावाए। स्वामी जी दूसरी बार 1899 ई. में अमेरिका गए और वहाँ उन्होंने न्यूयॉर्क, सैन फ्रासिस्कों, केलिफोर्निया तथा लॉस एंजिल्स में वेदांत समाज की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने पेरिस के एक धार्मिक सम्मेलन में भाग लिया ओर वहाँ भी उन्होंने हिंदू धर्म का प्रचार-प्रसार किया। 4 जुलाई, 1902 कौ 39 वर्ष की अल्पायु में ही स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हो गई। 

स्वामी विवेकानंद का सामाजिक विचार

■ नव हिंदूवाद की अवधारणा का विकास (पश्चिम का भौतिकतावाद और पूर्व का आध्यात्मवाद का मिश्रण)। 

■ नव वेदांतवादी (विवेकानंद के अनुसार ईश्वर का वास्तविक साक्षात्कार मनुष्य में करना चाहिये अर्थात्‌ सभी ईश्वर एक है)

■ धार्मिक समन्वय (सभी धर्मों का उद्देश्य ईश्वर को प्राप्त करना है)। 

■  मानव-सेवः को बहुत महत्त्वपूर्ण माना गया। विवेकानंद मानवता की सेवा को ही सच्ची ईश्वर संवा मानते थे। 

■ मूर्ति पूजा का समर्थन (क्योंकि मूर्ति पृजा. उपासना का उत्तम एवं सरल तरीका हैं, मूर्ति पूजा से आध्यात्मवाद का विकास बडी सरलता से किया जा भकता हे)। 

■  उन्होंने हिंदू धर्म के पृथकतावादी सिद्धांत की आलोचना की तथा उसके मुझे मत छुओ के आदर्श की घोर निंदा की। 

■ शिकागों के विश्व धर्म सम्मेलन में विवेकानंद ने भारतीय आध्यात्मिकता का परचम लहराया। 

■ स्वामी विवेकानंद ने लोगों में राजनीतिक चेतना का प्रच्मार किया तथा युवा पीढ़ी से अपील की कि वे भारत की प्राचीन सभ्यता पर गर्व करें तथा भविष्य में भारत की संस्कृति को मानव जाति के कल्याणार्थ समर्पित करें। 

स्वामी विवेकानंद के शैक्षिक विचार

 स्वामी जी ने व्यावहारिक शिक्षा पर बल दिया। वे शिक्षा के माध्यम से मनुष्य को लोकिक एवं पारलोकिक दोनों जीवन के लिये तैयार करना चाहते थे। उनके अनुसार, शिक्षा ऐसी होनी चाहिये, जिससे चरित्र वा गठन हो, मन का बल बढ़े, बुद्धि का विकास हो और व्यक्ति स्वावलंबी बने।

उन्होंने सर्वसाधारण में शिक्षा का प्रचार एवं प्रसार तथा देश की आर्थिक प्रगति के लिये तकनीकी शिक्षा पर भी बल दिया। इस प्रकार उदीयमान भारतीय राष्ट्रवाद के विकास में विंवेकानंद ने महत्त्वपूर्ण भूगिका निभाई।

जनमानस की जाग्रति, भौतिक एवं नैतिक शक्ति का विकास, समान आध्यात्मिक विचारों पर अवलंबित एकता तथ! प्राचीन भारतीय संस्कृति के गौरव के प्रति जागरूकता एवं स्वाभिमान उनकी राष्ट्रवादी विचारधारा के चार प्रमुख स्तंभ थे। आध्यात्मिक, शारीरिक एवं बौद्धिक विकास का आग्रह करते हुए उन्होंने युवकों से राष्ट्रीय उत्थान में योगदान देने को कहा। इस प्रकार विवेकानंद ने अध राष्ट्‌ भक्ति के स्थान पर उदार एवं व्यापक अंतराष्ट्रीय दृष्टिकोण को अधिक महत्त्व दिया। 

इन्हे भी देखे – साइमन कमीशन पर निबंध

रामकृष्ण मिशन और स्वामी विवेकानंद

रामकृष्ण परमहंस ( 1836- 1886 ईस्वी ) :

यह कलकत्ता के समीप स्थित दक्षिणेश्वर काली मंदिर के पुजारी थे इनका प्रारंभिक नाम गदाधर भट्टाचार्य था शंकर वेदांत से समृद्ध तोतापुरी ने इन्हें दीक्षित कर रामकृष्ण का नाम दिया उस समय कृपया सभी धर्म सुधार कोने केशव चंद्र सेन और दयानंद रामक इस मिशन का उद्देश्य समाज की सेवा करना है

इसका आदर्श वाक्य “ईश्वर की आराधना का सर्वोत्तम मार्ग है मानव जाति की सेवा”

रामकृष्ण मिशन अपने सार्वजनिक कार्यों के लिए सुप्रसिद्ध हो गया मिशन ने बाढ़ अकाल तथा महामारी ओके समय राहत के कार्य किए विवेकानंद ने भारतीय और पाश्चात्य दर्शन का गहन अध्ययन किया था

स्वामी विवेकानंद ने प्रबुद्ध भारत व उद्बोधन नामक पत्रिकाओं का प्रसाद प्रकाशन किया ष्ण से शिक्षा प्राप्त की थी रामकृष्ण के उपदेशों के प्रचार तथा उन्हें व्यवहार में लाने के उद्देश्य से उनके प्रिय शिष्य विवेकानंद ने 1 मई 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।

इस मिशन का उद्देश्य समाज की सेवा करना है रामकृष्ण मिशन अपने सामाजिक कार्यो के लिए प्रसिद्ध हो गया मिशन ने बाढ़, अकाल, तथा मारामारी के समय राहत कार्य किया।

विवेकानंद ने भारतीय और पाश्चात्य दर्शन का गहन अध्ययन किया था। स्वामी विवेकानंद ने प्रबुद्ध भारत और उद्बोधन नामक पत्रिकाओं का प्रकाशन किया। राजयोग, कर्मयोग, एवं वेदांत दर्शन उनकी प्रसिद्ध पुस्तके है।

मातृभूमि की दुर्दशा से वे अत्यंत दुखी थे। संपूर्ण देश की यात्रा करने पर उन्हें चारो ओर गरीबी, बौद्धिक जड़ता और भविष्य के प्रति निराशा देखने को मिली।

उन्होंने स्पष्ट कहा था कि अपनी इस दरिद्रता और अभिनति के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं उन्होंने नई समाज- व्यवस्था लाने के लिए गरीबी दूर करने और जनता को जागृत करने के लिए भारत वासियोंं से आजीवन प्रयास करनेे को कहा।

1893 मे विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो नगर मे आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन मे भाग लिया उस सम्मेलन दिए गए उनके भाषण ने दूसरे देशों के लोगों को बड़ा प्रभावित किया।

स्वामी विवेकानंद 1897 मे दोबारा अमेरिका गए और उन्होंने न्यूयॉर्क मे वेदांत सोसायटी की स्थापना की।

रामकृष्ण मिशन की स्थापना किसने की।

सन 1 मई 1897 ईस्वी को स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की

नरेंद्र नाथ दत्त को स्वामी विवेकानंद की उपाधि किसने दी।

महाराज खेतड़ी ने नरेंद्रनाथ दत्त को स्वामी विवेकानंद की उपाधि दी

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